हार्ट अटैक आने पर तुरंत उठाए जाने वाले कदम (पूरी जानकारी)

 हार्ट अटैक आने पर तुरंत उठाए जाने वाले कदम (पूरी जानकारी)


गर किसी व्यक्ति को अचानक सीने में तेज दर्द, सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना महसूस हो, तो यह हार्ट अटैक (Heart Attack) के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि तुरंत सही कदम उठाने से मरीज की जान बच सकती है। यहाँ पूरी जानकारी दी जा रही है:

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1. सबसे पहले करें ये काम

· तुरंत इमरजेंसी सेवा (एंबुलेंस) को कॉल करें: भारत में 108 या 102 नंबर डायल करें और मरीज की स्थिति के बारे में बताएं। यह सबसे जरूरी कदम है।· मरीज को आरामदायक स्थिति में बैठाएं या लिटाएं: उसे लेटने से बेहतर है कि उसे सिर और कंधों को सहारा देकर आधा बैठाया जाए (सेमी-रेक्लाइनिंग पोजीशन)। इससे सांस लेने में आसानी होती है और दिल पर दबाव कम पड़ता है।· कपड़े ढीले करें: गले, छाती और कमर के आस-पास के कपड़े (जैसे टाई, बेल्ट या बटन) ढीले कर दें ताकि सांस लेने में तकलीफ न हो।

2. अगर मरीज होश में है (बात कर रहा है):

· एस्पिरिन (Aspirin) दें: अगर मरीज को एस्पिरिन से एलर्जी नहीं है या डॉक्टर ने मना नहीं किया है, तो 300 मिलीग्राम (आमतौर पर 3 पीसी) एस्पिरिन की गोली दें। उसे इसे चबाकर खाने के लिए कहें। एस्पिरिन खून के थक्के (क्लॉट) को बढ़ने से रोकता है।· पानी या कुछ भी पीने को न दें: अगर मरीज को निगलने में परेशानी हो रही है या वह बेहोशी की हालत में है, तो कुछ भी पीने या खाने को न दें।3. अगर मरीज बेहोश हो जाए या नाड़ी न चल रही हो:

· तुरंत सीपीआर (CPR) शुरू करें: अगर मरीज सांस नहीं ले रहा है या उसकी नब्ज नहीं चल रही है, तो बिना देर किए सीपीआर दें।

  · कैसे करें: मरीज को सख्त सतह (जैसे जमीन) पर पीठ के बल लिटाएं। दोनों हाथों को एक के ऊपर एक करके मरीज की छाती के बीचों-बीच (निप्पल के बीच की रेखा पर) रखें। अपने पूरे शरीर का भार डालते हुए सीने को करीब 2 इंच (5-6 सेंटीमीटर) तक दबाएं। हर मिनट में 100-120 बार की रफ्तार से दबाएं। 30 बार दबाने के बाद मरीज के मुंह में सांस दें (अगर आपको प्रशिक्षण मिला हो)। एंबुलेंस आने तक इसे लगातार जारी रखें।

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4. डॉक्टर को दिखाने के बाद तक ध्यान रखें:· एंबुलेंस का इंतजार करें: मरीज को खुद अस्पताल ले जाने की बजाय एंबुलेंस का इंतजार करना बेहतर है, क्योंकि एंबुलेंस में इमरजेंसी इलाज की सुविधा होती है और डॉक्टर से संपर्क भी रहता है।

· मरीज को अकेला न छोड़ें: उसकी हिम्मत बंधाएं और उसे शांत रखने की कोशिश करें। तनाव या डर से दिल की धड़कन और बढ़ सकती है। 5. क्या न करें (सामान्य गलतियाँ):· घबराएं नहीं: घबराने से सही फैसला लेने में मुश्किल होती है।· मरीज को चलने न दें: मरीज को खुद डॉक्टर के पास जाने के लिए उकसाएं नहीं। उसे आराम करने दें।· बिना सलाह के कोई और दवा न दें: डॉक्टर या इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) की सलाह के बिना कोई और दवा (जैसे सोरबिट्रेट) न दें, इससे ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है।· पानी का छिड़काव या कुछ और न करें: मरीज को होश में लाने के लिए पानी के छींटे मारने या झकझोरने की कोशिश न करें।

Disclaimer

नोट: यह जानकारी केवल आपात स्थिति में मदद के लिए है। हार्ट अटैक एक गंभीर स्थिति है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके डॉक्टरी सहायता लेना ही सबसे सही इलाज है।